नरवाई की आग कब होगी शांत ?

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जबलपुर :- प्रतिवर्ष नरवाई की आग से जिले में सेकड़ो नहीं हजारों बीघा फसल जल कर राख हो जाती है लेकिन आज तक नरवाई जलाने से किसान बाज नहीँ आ रहा है साथ ही प्रशासन भी चुप्पी साधकर बैठा है अब ऐसे में सवाल उठता है की जिस नरवाई की आग से प्रतिवर्ष जिले भर में हजारों बीघा फसलें जलकर राख हो जाती है क्या कभी इस नरवाई की आग पर लगाम लग सकेगा या यों ही इस नरवाई की आग का सिलसिला चलता रहेगा आज हम बात कर रहे है सिहोरा तहसील की जहाँ पर सिहोरा के अंतर्गत आने वाले विभिन्न ग्रामो में किसान धान और उड़द फसलों की कटाई के बाद नरवाई में आग लगाने से बाज नही आ रहे है। गेहूं और चने की कटाई के बाद धान व उड़द की फसलों की कटाई के बाद किसान नई फसल लेने के लिए खेतों में धान की फसलों की नरवाई में आग लगा रहे हैं उन्हें अगली फसलों की चिंताएं सताने लगी हैं। किसान एक फसल के कटने के बाद दूसरी फसल की तैयारियों में लगा है। उसके सामने सबसे बड़ी चिंता इस बात की है कि खेतों में जो फसल कटने के बाद जो कचरा फैला हुआ है, उसे कैंसे नष्ट किया जाए। किसान खेतों को साफ करने के स्थान पर कचरे में आग लगाने का सहारा ले रहा है। खेतों में खड़ी नरवाई में आग लगने की घटनाएं सिहोरा में हर रोज सामने आ रही हैं।

★खेतों के नुक्सान से अनजान किसान,

नरवाई की आग से जहां खेतों में फैलती आग आसपास बने घरों तक पहुंच जाती है, वहीं खेत भी खेती की दृष्टि से ऊसर होते जा रहे हैं। कृषि वैज्ञानिकों की सलाह को किसान स्वीकार नहीं कर रहे हैं। जिसके कारण सिहोरा विकासखण्ड के खेत आग लगने के बाद काले कजरारे खेत देखे जा सकते हैं।

★ऐसा करें किसान,

विकासखण्ड में फसल काटने के लिए दो प्रकार का सहारा लिया जाता है। एक, फसल काटने के लिए मजदूर आते हैं और दूसरा, हारवेस्टर का सहारा लिया जाता है। जो मजदूर फसल काटते हैं, उसमें कचरा कम हो पाता है। जो कचरा फसल के साथ आता है बाद में उसका पशुचारे के रूप में उपयोग कर लिया जाता है। किन्तु हारवेस्टर द्वारा जो कटाई की जाती है, उसमें खेतों में फसल के डंठल खड़े होकर रह जाते हैं। जिसे नरवाई कहा जाता है। इस नरवाई को हटाने के लिए किसानों को अधिक धन राशि खर्च करना पड़ती है। जबकि आग लगाने में उन्हें सिर्फ एक तीली का सहारा लेना पड़ता हैं ।जिसके कारण खेतों में फैला कचरा जलकर नष्ट हो जाता है। इस काम में किसानों को पैसा खर्च नहीं करना पड़ता। इस कारण किसान इसका प्रमुखता से सहारा लेते हैं, लेकिन खेतों में जलने वाली आग भले ही कचरे को नष्ट कर दे, किन्तु इस आग लगाए जाने के बाद एक तो इस बात का सबसे बड़ा खतरा रहता है कि यह आग एक के बाद एक कई खेतों में सुलगती जाती है और कई बार गांव तक पहुंचने की संभावनाएं भी बनी रहती हैं। ऐंसा कई बार हवा चलने के कारण होता है। पूर्व में नरवाई में आग लगाए जाने पर प्रशासन के प्रतिबंध बाद भी किसानों ने नरवाई में आग लगाने के संबंध में कोई सबक नहीं लिया।

खेतों में आग लगाए जाने के मामले सिहोरा सहित आसपास के ग्रामो में कई बार यहां की फायर बिग्रेड को मौके पर पहुंचकर आग बुझाना पड़ा है, लेकिन हर रोज कहीं न कहीं नरवाई में आग लगती देखी जा सकती है। इस संबंध में कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि किसान यदि चाहें तो रोटाबेटर कृषि यंत्र के माध्यम से जो नरवाई खड़ी है, उसे ही खाद के रूप में उपयोग में ले सकते हैं।

★ नरवाई जलाने पर जुर्माना

पर्यावरण को नुकसान पहुंचने के कारण फसलकटाई के बाद बची फसल यानी नरवाई को जलाना प्रतिबंधितहै इसमें जुर्माने काप्रावधान है । नरवाई जलाने पर यह जुर्माना पर्यावरण क्षतिपूर्ति के रूपमें है । नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने भी पर्यावरण प्रदूषण एवंनियंत्रण अधिनियम 1981 के तहत धान व गेहूं की फसलकटाई के बाद बची फसल को जलाने पर प्रतिबंध लगाया है । कृषि विभाग कहता है की फसल काटने के बाद बची फसल या नरवाई जलाना आम समस्या है।अधिकतर जगह किसान श्रम व पैसा बचाने के लिए नरवाईजला देते हैं, लेकिन नरवाई जलाने से जमीन की उर्वरा शक्ति पर विपरीत असर पड़ता है । साथ ही प्रदूषण भी फैलता है । इसकारण कोर्ट व सरकार द्वारा इस पर प्रतिबंध लगाया गया है ।

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ख़बर चुराते हो अभी पोलखोल दूंगा
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