धारा 370 के प्रावधानों को पूरी तरह खत्‍म नहीं किया गया ,साल्वे

0

नई दिल्‍ली,धारा 370 पर राज्यसभा में गृहमंत्री अमित शाह द्वारा संकल्प पेश करने को लेकर संविधान विशेषज्ञ सुभाष कश्‍यप, पूर्व सॉलिसीटर जनरल हरीश साल्‍वे व प्रसिद्ध वकील प्रशांत भूषण ने जम्‍मू कश्‍मीर में अनुच्‍छेद 370 पर अपना विचार जाहिर किया है। सुभाष कश्‍यप व हरीश साल्‍वे का कहना है कि अनुच्‍छेद 370 के प्रावधानों को पूरी तरह खत्‍म नहीं किया गया है। वहीं प्रशांत भूषण ने इसे असंवैधानिक करार दिया है।दैनिक जागरण कज खबर के मुताबिक संविधान विशेषज्ञ सुभाष कश्‍यप ने अनुच्‍छेद 370 पर कहा, ‘संवैधानिक तौर पर यह सही है, इसमें कानूनी और संवैधानिक तौर पर किसी तरह की गलती नहीं है। सरकार ने पूरी सतर्कता से इसका अध्‍ययन किया है। यह राजनीतिक फैसला है इसलिए इस पर कहने को मेरे पास कुछ नहीं है।’उन्‍होंने आगे बताया कि अनुच्छेद 370 को पूरी तरह से नहीं हटाया गया है। अनुच्छेद 370 तीन भागों में बंटा हुआ है। जम्मू-कश्मीर के बारे में अस्थाई प्रावधान है जिसको या तो बदला जा सकता है या फिर हटाया जा सकता है। अमित शाह के अनुसार, 370(1) मौजूद है, केवल 370 (2) और (3) को हटाया गया है।

370(1) में प्रावधान के मुताबिक जम्मू और कश्मीर की सरकार से सलाह करके राष्ट्रपति आदेश द्वारा संविधान के विभिन्न अनुच्छेदों को जम्मू और कश्मीर पर लागू कर सकते हैं। 370(3) में प्रावधान था कि 370 को बदलने के लिए जम्मू और कश्मीर संविधान सभा की सहमति चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि 35A के बारे में यह तय नहीं है कि वह खुद खत्म हो जाएगा या फिर उसके लिए संशोधन करना पड़ेगा।

पूर्व सॉलीसीटर जनरल हरीश साल्‍वे ने कहा कि सरकार ने संविधान के अनुच्‍छेद 370 को नहीं हटाया है बल्‍कि इसके प्रावधानों को हटाया है जिसमें अनुच्‍छेद 35 ए भी शामिल है। सुप्रीम कोर्ट में साल्‍वे ने मीडिया से बताया, ‘अनुच्‍छेद 370 के बदले गए प्रावधानों को राष्‍ट्रपति आदेश के बाद ही पेश किया जाएगा।‘

वर्ष 1954 में राष्‍ट्रपति की शासन के द्वारा अनुच्‍छेद 35 ए लागू किया गया था। आज इसी आदेश को निरस्‍त किया गया है। कश्मीर के महाराजा हरि सिंह और भारत सरकार के बीच हुए समझौते के बाद 1954 में राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद के आदेश से अनुच्छेद 35 ए को भारतीय संविधान में जोड़ा गया था। इस अनुच्छेद को संविधान में शामिल करने से कश्मीरियों को विशेषाधिकार मिला। इसके अनुसार, कोई बाहरी जम्‍मू कश्‍मीर में संपत्‍ति नहीं खरीद सकता है और न ही नौकरी कर सकता है। इसके अलावा यहां की महिलाएं अगर किसी बाहरी के साथ विवाह के बंधन में बंधती हैं तो यहां की संपत्‍ति पर उनका कोई हक नहीं होगा। इसे चुनौती देने वाली कई याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में लंबित है।

राज्‍य के पुनर्गठन को लेकर साल्‍वे ने कहा, ‘राज्‍य के बंटवारे को लेकर संसद में दो बार विधेयक पेश किया जाएगा। संसद से पारित होने के बाद ही इस विधेयक को महत्‍व मिलेगा… यह राजनीतिक फैसला है।

प्रशांत भूषण ने अपने ट्वीटर हैंडल के जरिए इस फैसले को असंवैधानिक करार दिया है। उन्‍होंने ट्वीट किया कि अनुच्‍छेद 370 में किसी तरह के संशोधन पर जम्‍मू कश्‍मीर विधानसभा की ओर से भी मंजूरी आवश्‍यक है। केवल राष्‍ट्रपति या राज्‍यपाल के मुहर से यह नहीं हो सकता। ऐसा करना असंवैधानिक है।

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

0 0 vote
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Inline Feedbacks
View all comments
ख़बर चुराते हो अभी पोलखोल दूंगा
0
Would love your thoughts, please comment.x
()
x