दस्तक अभियान में जनप्रतिनिधियों और स्वैच्छिक संगठनों की सहभागिता भी सुनिश्चित की जाय कलेक्टर

जबलपुर : कलेक्टर श्री भरत यादव ने बच्चों में जन्मजात बीमारियों, विकृतियों और कुपोषण की पहचान के लिये जिले में दस जून से चलाए जाने वाले दस्तक अभियान के प्रति जन -जागरूकता पैदा करने की जरूरत बताते हुए इस अभियान में जनप्रतिनिधियों, सामाजिक, स्वैच्छिक एवं गैर सरकारी संस्थाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं । श्री यादव आज शनिवार को कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में दस्तक अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु नियुक्त नोडल अधिकारियों की बैठक को सम्बोधित कर रहे थे । कलेक्टर ने कहा कि बच्चों के स्वास्थ्य जैसे सामाजिक सरोकार से जुड़े इस महत्वपूर्ण अभियान की सफलता के लिए हर एक को अपने – अपने स्तर पर व्यक्तिगत रुचि लेकर कार्य करना होगा । उन्होंने नोडल अधिकारियों से कहा कि शहरी और ग्रामीण क्षेत्र में एक साथ चलाए जा रहे इस अभियान की हर गतिविधियों की उन्हें निगरानी करनी होगी । श्री यादव ने बच्चों के सर्वे के लिए घर-घर दस्तक देने नियुक्त दस्तक दल के कामकाज की मॉनिटरिंग करने तथा प्रतिदिन का फीडबैक जिला स्तर पर देने के निर्देश नोडल अधिकारियों को दिए ताकि अभियान की कमियों को तुरन्त किया जा सके और इसका बेहतर क्रियान्वयन किया जा सके। कलेक्टर ने अभियान के लिए तैयार माइक्रो प्लान पर भी नोडल अधिकारियों के साथ चर्चा की । उन्होंने नोडल अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिये कि दस्तक अभियान के तहत आयोजित स्वास्थ्य सभाओं में बच्चों के स्वास्थ्य के साथ-साथ स्वच्छता सम्बंधित आदतों एवं व्यवहार, भोजन में आवश्यक पोषक तत्व जैसे मुद्दों पर चर्चा की जाये तथा जरूरी परामर्श एवं सुझाव बच्चों के अभिभावकों को दिये जायें । उन्होंने स्वास्थ्य सभाओं में भी स्थानीय जनप्रतिनिधियों, पंच-सरपंच, जिला एवं जनपद सदस्यों को आमंत्रित करने के निर्देश देते हुए कहा कि जनप्रतिनिधियों के प्रभाव का इस्तेमाल बच्चों के अभिभावकों को स्वास्थ्य संबंधी समझाइश देने में किया जा सकता है । श्री यादव ने स्वास्थ्य सभाओं में बारिश के मौसम में होने वाले जल जनित रोगों से बचाव के उपायों पर भी चर्चा करने की बात कही । उन्होंने कहा कि पौधारोपण सहित अन्य विषयों को भी स्वास्थ्य सभाओं में शामिल किया जा सकता है ।
कलेक्टर ने दस्तक अभियान के तहत ग्राम स्तर पर आयोजित की जाने वाली स्वास्थ्य सभाओं में महिलाओं के साथ-साथ पुरूषों को भी शामिल करने पर विशेष जोर दिया । उन्होंने कहा कि माँ तो बच्चों के स्वास्थ्य के प्रति चिंतित रहती है लेकिन पिता इस मामले में बेखबर रहते हैं अथवा इसे प्राथमिकता नहीं देते और बच्चों को इलाज के लिए बाहर भेजने जल्दी तैयार भी नहीं होते । कलेक्टर ने बैठक में दस्तक अभियान के तहत गंभीर रोगों से ग्रसित बच्चों के रेफरल तैयार करने और उन्हें क्या उपचार दिया जा रहा है इसका फालोअप भी नियमित रूप से लेने के निर्देश नोडल अधिकारियों को दिये ।
बैठक में बताया गया कि दस्तक अभियान के तहत बच्चों में जन्मजात रोगों एवं विकृतियों की पहचान के लिए स्वास्थ्य कार्यकर्त्ता, आंगनबाड़ी कार्यकर्त्ता एवं आशा कार्यकर्त्ताओं के दल बनाये गये हैं । ये दल पांच वर्ष तक की आयु वाले प्रत्येक परिवार के घर-घर जाकर दस्तक देंगे और बच्चों के स्वास्थ्य एवं अक्सर होने वाली बीमारियों की जानकारी लेंगे । इसके साथ ही परिवार को स्वच्छता संबंधी परामर्श भी दस्तक दलों द्वारा घरों में भेंट के दौरान दी जायेगी । दस्तक दल बच्चों के पोषण स्तर, टीकाकरण के बारे में अभिभावकों से चर्चा करेंगे तथा छह माह से पांच वर्ष तक की आयु के बच्चों को विटामिन “ए” की खुराक पिलायेंगे । उल्टी-दस्त से ग्रसित होने वाले बच्चों के परिवारों को ओआरएस एवं जिंक के पैकेट का वितरण दस्तक दलों द्वारा किया जायेगा तथा एनीमिया के शिकार बच्चों की पहचान भी इनके द्वारा की जायेगी । दस्तक दलों को एक दिन में घरों में दस्तक देने तथा एक परिवार के साथ 25 से 30 मिनट तक बच्चों के स्वास्थ्य एवं स्वच्छता पर परिवारजनों को समझाइश देने के निर्देश दिये गये हैं ।
बैठक में बताया गया कि 20 जुलाई तक चलने वाले इस अभियान का माइक्रो प्लान तैयार किया गया है तथा इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए उप स्वास्थ्य केन्द्र स्तर पर नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की गई है तथा खंड स्तर पर एसडीएम के नेतृत्व में टास्क फोर्स समिति का गठन किया गया है । बैठक में जिला पंचायत की सीईओ रजनी सिंह, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. मुरली अग्रवाल भी मौजूद थे । बैठक में बताया गया कि दस्तक अभियान का संचालन स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास तथा जिला पंचायत के सहयोग से किया जायेगा ।

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