दस्तक अभियान के उत्कृष्ट क्रियान्वयन में जबलपुर प्रदेश में प्रथम

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जबलपुर ,दस्तक अभियान के अब तक के क्रियान्वयन के मामले में जबलपुर जिला प्रदेश में पहली रैंक पर है। प्रदेश के सभी जिलों में 10 जून से शुरू किए गए दस्तक अभियान की अब तक की जिलेवार उपलब्धियों और प्रगति की बिन्दुवार समीक्षा के बाद राज्य शासन द्वारा जिलेवार जारी रैंकिंग में जबलपुर संभाग का डिंडौरी जिला प्रदेश में दूसरा, मण्डला ने आठवां, सिवनी नवमा और बालाघाट जिले ने दसवाँ स्थान अर्जित किया है।
जबलपुर जिले में कलेक्टर भरत यादव के मार्गदर्शन और निर्देशन में चल रहे दस्तक अभियान के तहत अब तक सर्वे टीम जिले के 1274 गांवों के बच्चों की स्क्रिनिंग कर चुकी है । अब तक गंभीर एनीमिया (रक्ताल्पता) से पीड़ित 116 बच्चों को खून चढ़ाया गया है। जबकि 383 कुपोषित बच्चों को पोषण पुनर्वास केन्द्रों में भर्ती कर पौष्टिक आहार और जरूरी चिकित्सकीय सुविधा मुहैया कराई गई है। इसी प्रकार 434 बच्चे जन्मजात बीमारी और विकृतियों से पीड़ित मिले। इन सभी के नि:शुल्क इलाज की व्यवस्था की गई है। दस्तक टीम बच्चों के अभिभावकों से मिलकर बच्चों की जन्मजात बीमारी और विकृतियों से संबंधित हर जानकारी संकलित कर रही है। दस्तक अभियान 20 जुलाई तक चलेगा। अभियान के तहत पांच वर्ष तक की आयु के शारीरिक विकृति वाले बच्चों का भी प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थानों में नि:शुल्क इलाज का प्रावधान है। दस्तक दल द्वारा बच्चों को विटामिन ए की खुराक और ओ.आर.एस. के पैकेट भी वितरित किए जा रहे हैं । जिले में 5 वर्ष से कम आयु के दो लाख 5 हजार 917 बच्चे हैं। दस्तक दल इन सभी बच्चों तक पहुंचेगा। अब तक के सर्वे में मिले जिले के कुपोषित बच्चों को पोषण पुनर्वास केन्द्र में भर्ती कर नि:शुल्क इलाज किया जा रहा है। इनमें से कुछ बच्चों की छुट्टी हो भी गई है, उनका वजन भी बढ़ा है, एनीमिया (रक्ताल्पता) पीड़ित बच्चों को खून भी चढ़ाया गया है। जिले के 1274 ग्रामों में दस्तक ग्राम सभाओं का आयोजन कर बच्चों के अभिभावकों और जनसमुदाय को बच्चों को बीमारी से बचाने के तौर-तरीकों की जानकारी दी जा रही है।

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ख़बर चुराते हो अभी पोलखोल दूंगा
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