दशहरे में कोरोना का ग्रहण,सौ सालों से भी ज्यादा का बदलेगा इतिहास

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सिहोरा एसडीओपी की समिति के सदस्य से तीखी नोकझोंक क्यों हुई?

बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व दशहरा हर साल बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता था ,कहते है इस दिन भगवान श्रीराम ने रावण का वध किया था,और सत्य की जीत हुई थी ,जिसके बाद हर साल लोग रावण का पुतला फूंक कर जश्न मनाते है,लेकिन इस बार त्यौहारों में अब कोरोना का ग्रहण लग गया है, महामारी के चलते चल समारोहों में पूरी तरह प्रतिबंध लग चुके है, तो वहीँ समितियों द्वारा अब एक नियत संख्या के साथ बिना डीजे के चल समारोह निकालकर दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन कुंड में विर्सजन करना होगा,साथ ही सत्य की असत्य पर जीत का ये पर्व हम सब मना रहे है, लेकिन अब देखना होगा की कोरोना रुपी बुराई पर कब तक जीत हो मिल पायेगी?

सौ से ज्यादा वर्षों का बदलेगा इतिहास

आपको बता दें की तकरीबन डेढ़ सौ वर्षों के इतिहास में ये पहली बार होने जा रहा है, जब दशहरा बगैर धूमधाम से मनाया जाएगा ,क्योंकि कोरोना महामारी के चलते प्रशासन ने चल समारोहों पर प्रतिबंध लगा दिया है, कोई भी दुर्गा प्रतिमा के साथ दस से ज्यादा लोग शामिल न होंगे डीजे पर भी पूर्णतः प्रतिबंध है,और सभी को सादगी पूर्वक दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन करना होगा,हलाकि व्यवस्था बनाने प्रशासन भी पूरी तरह कमर कस चुका है,

तेज साउंड बनाने पर sdop की नोकझोंक

वहीँ हाल की एक घटना सिहोरा के आजाद चौक से सामने आई जहाँ पर तेज आवाज में साउंड बजाने पर सिहोरा एसडीओपी आईपीएस सुतकीर्ती सोमवंशी की समिति के एक सदस्य से तीखी नोकझोंक हो गई ,जिसके बाद समिति के सदस्यों ने विरोध स्वरूप बिजलीं बन्द कर अँधेले में आरती की थी ,मामले को शांत करवाने एएसपी शिवेश सिंह बघेल सिहोरा पहुँचे और किसी तरह मामले को शांत करवाया,लेकिन ऐसे में सवाल उठता है की आजाद चौक में व्यवस्था के लिए पहले से ही तैनात पुलिस कर्मियों ने साउंड की तेज आवाज में पहले से ही क्यों ध्यान नहीँ दिया?क्यों एसडीओपी को ही आंगे आना पड़ा यदि वहाँ पर तैनात पुलिस कर्मी इस बात पर ध्यान देते हुए साउंड की आवाज पहले से कम करवा देते तो ऐसी नोबत ही क्यों आती?

भंडारों पर लगा प्रतिबंध,नहीं निकलेगा चल समारोह

वैसे तो जबलपुर सहित आसपास ग्रामीण अंचलों में सिहोरा पनागर ,कुंडम कटंगी मझौली,गोसलपुर,बुढागर के अलावा अन्य ग्रामीण अंचलों में माँ दुर्गा की प्रतिमाओं को स्थापित कर लोगों ने सादगी और श्रद्धा पूर्वक पूजन किया,इस दौरान प्रशासन द्वारा भी भरपूर प्रयास किये गए की सोशल डिस्टेंसिंग का पालन हो सके,गौरतलब है की जबलपुर के दशहरा के साथ पंजाबी दशहरा और रामलीला पूरे मध्यप्रदेश में प्रसिद्ध है, लेकिन कोरोना ग्रहण में त्यौहार की रंगत फीकी पड़ गई,लोगों में उत्साह तो था लेकिन दूसरी तरफ कोरोना का डर भी ,हर साल दुर्गा समितियों द्वारा विशाल भंडारे के आयोजन किये जाते थे,लेकिन इस बार कोरोना के कारण भंडारों में भी ब्रेक लग गया,इतना ही नहीँ समितियों को दशहरा चल समारोह निकालने की अनुमति नही है, सभी समिति अपनी -अपनी प्रतिमाओं को सादगी पूर्वक निकालकर विसर्जन कुंड में विसर्जन करेंगे

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ख़बर चुराते हो अभी पोलखोल दूंगा
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