चिन्हित स्थानों पर गौशालाओं का निर्माण कार्य शीघ्र प्रारंभ करें , कलेक्टर

बड़ी गौशालाओं का प्रस्ताव भी तैयार करें
गौशाला परियोजना समन्वय समिति की बैठक में कलेक्टर के निर्देश
जबलपुर,जिला गौशाला परियोजना समन्वय की आज कलेक्ट्रेट में आयोजित बैठक में कलेक्टर श्री भरत यादव ने परियोजना के तहत चिन्हित और सर्वे में उपयुक्त पाये गये सभी स्थानों पर गौशालाओं का निर्माण कार्य शीघ्र प्रारंभ करने के निर्देश दिये हैं । श्री यादव ने बैठक में गौशालाओं के निर्माण को शासन की प्राथमिकता बताते हुए कहा कि इस दिशा में किसी तरह की ढ़िलाई नहीं होनी चाहिए । उन्होंने चिन्हित और उपयुक्त पाये गये स्थानों पर गौशालाओं के निर्माण का काम ग्राम पंचायतों के माध्यम से कराने तथा निर्माण कार्य की देखरेख की जिम्मेदारी ग्रामीण यांत्रिकी सेवा को देने के निर्देश भी दिये । कलेक्टर ने बैठक में गौशाला परियोजना के तहत ग्रामीण क्षेत्र में बनाई जाने वाली 30 गौशालाओं के अलावा भी कम से कम एक हजार गौवंश की क्षमता वाली चार-पांच बड़ी गौशालाओं के निर्माण की आवश्यकता भी बताई । उन्होंने इसके लिए नगरीय क्षेत्र के आसपास और सड़क मार्ग के नजदीक जहां पानी, बिजली की उपलब्धता हो स्थान चिन्हित करने के निर्देश दिये । कलेक्टर ने कहा कि ऐसी गौशालाओं के निर्माण और संचालन में पीपीपी मोड को अपनाया जाना चाहिए। श्री यादव ने बैठक में कहा कि गौशाला परियोजना के तहत ऐसे चिन्हित स्थान जिन्हें सर्वे में बिजली, पानी की अनुपलब्धता के कारण अनुपयुक्त बताया गया है, उनकी जगह या तो नये स्थान चिन्हित किये जायें अथवा उन्हीं स्थानों पर सभी जरूरी सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में आवश्यक प्रयास किये जायें । उन्होंने गौशालाओं का निर्माण वर्षाकाल के दौरान पूरा कर लेने की हिदायत देते हुए कहा कि गौशाला निर्माण में शासन द्वारा तय गाइड लाइन का पालन हर हाल में करना होगा । श्री यादव ने गौशालाअें के निर्माण के बाद इनके संचालन की जिम्मेदारी शासन के निर्देशों के मुताबिक ही आजीविका मिशन के तहत गठित स्व-सहायता समूहों, गैर सरकारी संगठनों अथवा स्वयंसेवी संगठनों को सौंपने के निर्देश दिये । उन्होंने कहा कि गौशालाओं के संचालन की जिम्मेदारी सौंपने के पहले इन संस्थाओं के प्रस्तावों का गहन परीक्षण कर लिया जाये । श्री यादव ने इस अवसर पर गौशालाओं के संचालन में रूचि रखने वाली संस्थाओं एवं संगठनों की बैठक बुलाने के निर्देश भी दिये ।
मंदिरों की भूमि पर भी गौशाला के निर्माण का बनाये प्रस्ताव:
कलेक्टर ने बैठक में तीस एकड़ से अधिक भूमि वाले ऐसे सभी मंदिरों एवं धार्मिक ट्रस्टों की भूमि पर भी गौशालाओं के निर्माण के प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिये, जिन मंदिरों एवं ट्रस्टों का संधारण शासन द्वारा किया जा रहा है । श्री यादव ने इस बारे में ऐसे मंदिरों और ट्रस्टों के कर्ता-धर्ताओं की बैठक बुलाने निर्देश दिये । उन्होंने कहा कि इन मंदिरों और ट्रस्टों की भूमि पर बनाई जाने वाली गौशलाओं के संचालन की जिम्मेदारी भी इन्हें ही दी जानी चाहिए । श्री यादव ने ऐसे मंदिरों और ट्रस्टों से भी गौशालाओं के संचालन के लिए आर्थिक सहयोग प्राप्त करने की बात कही, जो परियोजना के अलावा शासन द्वारा संधारित की जा रही हैं तथा दान के रूप में बड़ी राशि इन्हें मिल रही है । उन्होंने कहा कि इस राशि का उपयोग गौशालाओं के संचालन जैसे अच्छे उद्देश्य के लिए किया जा सकता है । कलेक्टर ने बैठक में जिले में बड़ी गौशालाओं खोलने के लिए बनाये जाने वाले प्रस्तावों में सभी आर्थिक पहलुओं को भी शामिल करने के निर्देश दिये । श्री यादव ने कहा कि इन गौशालाओं के आसपास गोबर, गोमूत्र एवं दूध से बनने वाले उत्पादों की छोटी-छोटी इकाइयां स्थापित करने पर भी विचार किया जाना जरूरी है ताकि आर्थिक तौर पर गौशालाओं के संचालन में आगे कोई कठिनाई न आये । बैठक के प्रारंभ में उप संचालक पशुपालन डॉ. ए.पी. गौतम ने बताया कि गौशाला परियोजना के तहत 100 गौवंश की क्षमता वाली जिले को 30 गौशालाओं के निर्माण का लक्ष्य शासन से जिले को प्राप्त हुआ है । लक्ष्य के विरूद्ध जिले में 34 स्थान गौशालाओं के लिए चिन्हित किये गये और इसमें से 21 स्थानों को सर्वे के बाद उपयुक्त पाया गया है । गौशाला परियोजना समन्वय समिति की बैठक में वनमंडलाधिकारी रवीन्द्र मणि त्रिपाठीसभी एसडीएम तथा नगर निगम एवं संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद थे ।
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