गृहमन्त्री ने लिया आचार्य श्री का आशीर्वाद

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दयोदय में हुई धर्मसभा

जबलपुर :जैसे -जैसे चुनावों की तारीख नजदीक आती जा रही है वैसे -वैसे ही नेताओ को भगवान और साधू संत याद आ रहे है इसी कड़ी में भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता राजनाथ सिंह रविवार को जबलपुर संसदीय सीट के भाजपा प्रत्याशी राकेश सिंह के साथ दयोदय पहुंचे। उन्होंने आचार्य विद्यासागर महाराज से आशीर्वाद ग्रहण किया। इसके बाद प्रतिदिन की भांति धर्मसभा का आयोजन किया गया। इस दौरान आचार्यश्री ने कहा कि आत्मा का स्वभाव जानना और देखना है, तो साधना करनी होगी। एक भव से दूसरे भव में साधनों की अपेक्षा से, कर्मों की अपेक्षा से गति बदलती रहती है। जब हमारे भीतर से जीवन को लेकर महत्वपूर्ण प्रश्न उठने लगते हैं, तो अपने आप अभिमान आदि कई बुरे भाव दूर होने लगते हैं। प्रमाद के कारण क्षणों को व्यर्थ करना भी समझ में आने लगता है। उन्होंने कहा कि पहले कोई चीज बेचनी होती थी, तो ढिंढोरा पीटा जाता था। चौपाल पर यह क्रिया पूरी की जाती थी। इससे समय और ऊर्जा की बचत होती थी। हमें उस पुरानी प्रथा से सीख लेकर अपने क्षणों का महत्व समझना चाहिए। यदि क्षण में हम किसी वस्तु के बारे में खो जाएं तो अपने आप ही दिमाग काम करने लग जाए। इस तरह सही खोज भी अपने आप होने लग जाएगी। हम सिर्फ अपने अनुकूल क्या है, उसके बारे में सोचते रहते हैं और कार्य करते व कराते रहते हैं। जिसमें कृतज्ञता नहीं होती वह साधु की सेवा नहीं कर सकता। आलस्य से परिचित होने पर ही जीवन में निखार आता है।आचार्यश्री ने कहा कि देशी दवाओं में इतनी शक्ति है कि जो भयंकर रोग हैं, उनकी भी आसानी से चिकित्सा हो सकती है। हमारे आयुर्वेद में इतनी क्षमता विद्यमान है। इसलिए भारत के अतीत पर दृष्टि रखनी होगी। आविष्कार करते रहने पर कई नए तथ्य सामने आ सकते हैं। ग्रामीण पद्धति पर भरोसे की तरफ आंखों का खुलना आवश्यक है। जब लोग एलोपैथी से थक जाते हैं, तब पुरातन इलाज की तरफ ध्यान जाता है। हमें पुरानी किताबों को खोलना होगा, तब कहीं जाकर भारतीय उपचार का महत्व समझ में आएगा।

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ख़बर चुराते हो अभी पोलखोल दूंगा
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