गांव गांव हो रही है पैकारी, लाचार है आबकारी

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(ननकू यादव )

शराब ठेकेदारों ने सेटिंग कर बिछाया नशे का जाल

चंद सिक्कों की खनक के आगे मूकदर्शक बने जिम्मेदार

सतना :पूरे जिले के शराब माफियाओं के द्वारा निर्धारित दुकानो से शराब की सीमित बिक्री और कम मुनाफा के चलते ठेकेदारो की ओर से ठेकेदारो ने अपने अपने क्षेत्रो पर पुराने ठेकेदारो के नक्शे कदम पर चलते हुये गांव-गांव अवैध पैकारियां चलाने वालो को उधार हाल और गांव तक शराब स्कूटी व अन्य गाडियों के माध्यम से बेचने की सुविधा दे दी है। हालांकि आबकारी विभाग और पुलिस को सब पता है कि किस किस गांव मे कौन कौन अवैध शराब बेचने के धंधे मे लगा है। बावजूद इसके उन पर नही बल्कि अन्य किसी के द्वारा अवैध बिक्री किये जाने पर कार्यवाही की जाती है दूसरी ओर थानावार लगभग प्रतिदिन आबकारी एक्ट के तहत अपराध कायम तो हो रहे हैं जिससे पुलिस के रिकार्ड मे कार्यवाही के आंकड़े तो पूरे हो रहे हैं, लेकिन वास्तविकता मे अवैध शराब बिक्री रोकने का मकसद पूरा नही हो पा रहा है।
मैहर मैहर नगर सहित आसपास के 80 फीसदी गांवों में शराब ठेकेदारो द्वारा अवैध रूप से बिना रोक-टोक शराब बेची जा रही है। शराब ठेकेदार ने बाकायदा अपने खास लोगों के घर तक शराब पहुंचाने के लिये स्कूटी व बोलेरो के माध्यमों से भिजवाता है। जब जिसकों जिह जगह पर शराब चाहिए, स्थानीय कुछ खास लोगों के द्वारा वहां तक पहुंचा दिया जाता है। गांवों की स्थिति यह है कि गांव वालों को पानी की तलाश में मीलों भटकना पड़ता है पर मदिरा प्रेमी को गाँव में ही बिना मशक्कत किये शराब उपलब्ध हो जाती है। अवैध रूप से एक लाइसेंस पर गांव-गांव में संचालित की जा रही शराब बेचने वालो ने गांवों का माहौल पूरी तरह से दूषित कर दिया है वही बेरोकटोक शराब दुकान का शटर हमेशा खुला ही रहता है। वर्तमान शराब ठेकेदारो ने अपनी जड़ मजबूत करते हुये आबकारी विभाग को अपने चंगुल फांस लिया है जिससे उनके जाल मे नोट फंसने के बाद चुपचाप बैठकर तमाशा देखते रहते हैं। इसका कारण है कि आबकारी विभाग के सुस्त व लुंज पुंज होने की वजह से अब नये ठेकेदार बराबर सेटिंग बिठाने मे कामयाब हो गये हैं।
*मिल रहा मोटा सुविधा शुल्क*
गांवों में शराब के कारण दिनों दिन अपराधों में वृद्धि हो रही है, मैहर मे शराब के नशे मे कई अपराध भी हो जाते है या असामाजिक कृत्य हो जाते है *भाटिया कम्पनी के इंद्रजीत सिंह गिरी बाबा* द्वारा आसानी से गांव गांव तक शराब उपलब्ध कराकर भोले-भाले ग्रामीण को शराब की लत में जकड़ते जा रहे हैं। शायद ही कोई ऐसा गांव होगा जहां अवैध रूप से शराब नहीं बेची जा रही है। ऐसा नहीं कि पुलिस इस कारोबार से अंजान हो, बल्कि सारी जानकारियां होते हुए भी मोटे सुविधा शुल्क के एवज में इस कारोबार को अनदेखा कर रही है।
*ठेकेदारों ने जमाई जड़ें*
पुराने ठेकेदारो के नक्शे कदम पर चलते हुये गांव गांव अवैध पैकारियां चलाने वालो को शराब बेचने की हर सुविधा दी जाती है। हालांकि आबकारी व पुलिस को पता है कि किस गांव मे कौन अवैध शराब बिक्री मे लिप्त है बावजूद इसके उस पर नही बल्कि अन्य किसी के द्वारा अवैध बिक्री किये जाने पर कार्यवाही की जा रही है। दुकानो की ओर से गांव गांव अवैध पैकारियों की बाकायदे पुलिस व आबकारी के पास लिस्ट होती है। शराब ठेकेदार की पैकारियों के अलावा किसी और ने अवैध शराब बिक्री जैसे शुरू की गई तो उस पर पुलिस द्वारा कार्यवाही की जाती है।
*बिन भय, बिना डर होता अवैध परिवहन*
दारू कम्पनी भाटिया ग्रुप द्वारा गांव-गांव तक शराब पहुंचाने के लिए ठेकेदारो द्वारा पुलिस की सांठ-गांठ से जीपों से दिनदहाड़े परिवहन कराया जा रहा है। वहीं नगर के अवैध पैकारी करने वाले लोगों द्वारा बाईक से घर पंहुच सेवा प्रदाय की जा रही है। मैहर के बेरमा, कुटाई, पौड़ी, इटहरा, हिनाउता, इटमा, भारौली, कुसेडी, नकतरा, डंडी, उदयपुर, करैया, महराजनगर, अंधरा टोला, न्यू अरकंदी, हरदुआ, डेल्हा, भदनपुर, सरलानगर, बदेरा, लटागाव, जुड़ मानी, सारंग, बरा, सोनवरी, मड़ई, धनवाही, ककरा, भटूरा, साढ़ेरा, आजमाई न , सैलाईया, रिवारा, पहाड़ी, वंशीपुर, अमिलिया, नरौरा, तिलौरा, भेडा, गोबरी , चपना, कांसा, नादन, पता नहीं कितने गांवों का नाम बताया जाए अगर ये कहे कि पूरा का पूरा मैहर ही नशे की चपेट में है तो कोई अतिशयोक्ति न होगी शराब बेचने वाले एजेन्टों को शराब कंपनी के लोगों द्वारा जीपों के माध्यम से घर पर ही माल पहुंचाया जा रहा है व किराना दुकानों व पान ठेलोें में बिक्री की जा रही है। इसके अलावा ढाबों में भी दारू परोसी जा रही है।
*फसाद की जड़ बन रही शराब*
पुलिस की मिलीभगत से गांवों में चल रही अवैध शराब की बिक्री से कस्बों एवं छोटे-छोटे गांवों का माहौल दूषित हो रहा है। अवैध रूप से बेची जा रही शराब फसाद, लड़ाई, झगड़ों की जड़ बन चुकी है वही अवैध पैकारियों के चलते नशे का कारोबार बढ़ रहा है। युवाओ सहित बड़े बुजुर्ग तक नशे की लत मे पड़कर घरो मे कलहपूर्ण स्थिति निर्मित कर रहे हैं।
*दिखावे के लिए अभियान*
विभाग के उच्चाधिकारियों द्वारा जब भी अवैध शराब की बिक्री पर लगाम लगाने के लिए अभियान चलाया जाता है तो स्थानीय पुलिस व आबकारी विभाग के बीट प्रभारी द्वारा खाना पूर्ति के लिए फर्जी तरीके से छोटे-मोटे प्रकरण बना दिए जाते हैं। शराब माफियाओं तक पुलिस के हाथ नहीं पहुंच पाते हैं।
*आधी रात को भी मिलती है शराब*
दुकानदार टाइम के बाद अलग कमरों में शराब बेच रहे हैं। इतना ही नहीं, बेबाकी से बोल भी रहे हैं कि गोरखधंधे की मोटी कमाई का हिस्सा अधिकारियों तक पहुंचाया जा रहा है। कई ढाबों और होटलों में आधी रात को आसानी से शराब मिल रही है। बिक्री का समय तय होने के बावजूद नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही है। प्रदेश भर में शराब नीति लागू करने वाले मुख्यालय पर ही ये हाल है। सरकार को राजस्व हानि हो रही है तो शराब माफिया को भी शह मिल रही है। शराब पिलाने होटलों में बनाए स्पेशल कमरे, देर रात परोसी जाती है। देर रात शराब के शौकीनों को भरोसा दिलाया जाता है कि पुलिस कार्रवाई नहीं होगी।
*दोनो विभाग के साथ ठेकेदारो का गेम*
आबकारी व पुलिस को सब पता है, लेकिन मिलीभगत के कारण चुप हैं। ऐसा नगर के कई लोगों का कहना है। लोगों ने सवाल उठाए हैं कि जिम्मेदारों को सब पता है तो कार्रवाई क्यों नहीं कर रहे हैं।

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ख़बर चुराते हो अभी पोलखोल दूंगा
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