क्या एम पी में गिर जायेगी कमलनाथ सरकार? गोपाल भार्गव के दावों पर कांग्रेस का पलटवार

मध्यप्रदेश में वोटिंग के बाद नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव का राज्यपाल के नाम चिठ्ठी लिखना और भाजपा नेताओं द्वारा बार -बार सरकार गिराने का बयान देने के बाद एम पी की राजनीति गर्म हो गई है आपको बता दें की लोकसभा चुनाव 2019 के एग्जिट पोल के नतीजों ने नरेंद्र मोदी के एक बार फिर प्रधानमंत्री बनने की भविष्यवाणी कर दी है. इस बीच बीजेपी ने मध्य प्रदेश में कमलनाथ सरकार के अल्पमत में होने के आरोप लगाए हैं. नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने राज्यपाल को चिट्ठी लिखकर सत्र बुलाने की मांग की है. इसके बाद मध्य प्रदेश की राजनीति में हड़कंप मच गया है दरअसल, लोकसभा चुनावों से पहले भी बीजेपी नेताओं द्वारा लगातार यह बयान दिया जा रहा था कि अगर बीजेपी की सरकार दोबारा बनती है तो मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार संकट में आ जाएगी. इसी बीच समझते हैं कि मध्य प्रदेश विधानसभा का गणित दरअसल क्या है और इस विधानसभा चुनाव में कांग्रेस बीजेपी को कितनी सीटें मिली थीं.कुल 230 विधानसभा सीटों वाले मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2018 में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी, उसे 114 सीटें मिली थीं, हालांकि बहुमत के आंकड़े से वो दो सीटें दूर रह गई थी. बहुमत के लिए 116 सीटें चाहिए थीं, वहीं बीजेपी को 109 सीटें मिली थीं. इसके अलावा निर्दलीय को चार, बसपा को दो सीटें और सपा को एक सीट मिली थी.

जब बीजेपी नेता ने कहा, ‘ऊपर से सिग्नल मिला तो गिरा देंगे कमलनाथ सरकार’

चुनाव परिणाम के दिन ही सपा और बसपा ने कांग्रेस को समर्थन देने का ऐलान कर दिया था और निर्दलीय विधायक भी कांग्रेस के पक्ष में थे, इस प्रकार कांग्रेस ने अपने बहुमत का आंकड़ा साबित कर दिया था और कमलनाथ मध्य प्रदेश के नए मुख्यमंत्री बने थे.

हालांकि सरकार बनने के बाद ही सपा और बसपा के विधायक कांग्रेस से नाराज नजर आ रहे थे, लेकिन उन्हें बार-बार कमलनाथ द्वारा शांत करवाया जा रहा था. इसी दौरान बीजेपी के बड़े नेता भी आए दिन कमलनाथ सरकार को गिराने का दावा करते नजर आ रहे थे. कैलाश विजयवर्गीय ने लोकसभा चुनाव से पहले तो यहां तक कह दिया था कि जिस दिन ऊपर से आदेश होगा उसी दिन सरकार गिरा देंगे.और अब नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव की चिट्ठी से राजनीति फिर गर्म हो गई है इस चिट्ठी का रंग लाती है देखना होगा साथ ही गोपाल भार्गव ने कहा कि जिस तरह से केंद्र और राज्य में बीजेपी को अपार जनसमर्थन मिल रहा है. कई कांग्रेस के विधायक कमलनाथ सरकार से परेशान हो चुके हैं और बीजेपी के साथ आना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि बीजेपी खरीद-फरोख्त नहीं करेगी, लेकिन कांग्रेस के ही विधायक अब उनकी सरकार के साथ नहीं हैं

कांग्रेस का पलटवार :

राज्य के सहकारिता मंत्री डॉ. गोविंद सिंह ने कहा है कि वो पत्र लिखते या नहीं, तब भी हम सत्र बुलाते ही. हम जल्द ही प्रदेश में विधानसभा सत्र बुलाने वाले हैं. विधानसभा में बहुमत भी सिद्ध करेंगे. सरकर का काम चलना है, लोगों का वेतन देना है, विकास करना है. गोपाल भार्गव के कहने से सरकार नहीं चलती है. सरकार नियम कानून से चलती है. जिस दिन ये सत्ता में आ जाएंगे, उस दिन मान लेंगे नेता हैं भार्गव. अगर बहुमत साबित करना होता तो भाजपा पहले ही कर लेती. राज्यपाल ने सबको मौका दिया था.
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष और मुख्यमंत्री कमलनाथ के मीडिया समन्वयक नरेन्द्र सलूजा ने भी नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव के बयान पर पलटवार करते हुए 23 मई तक इंतजार करने की सलाह दी है. उन्होंने कहा कि अभी 23 मई का इंतजार करिए. उसके बाद आपकी पार्टी के ही विधायक, नेता, उम्मीदवार आपके खिलाफ विरोध का बिगुल बजाने वाले हैं. आपके पद पर ही संकट आने वाला है. अपने विधायकों को भी संभाल कर रखिए. 109 में से कई… संपर्क में हैं.
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