किसानों से पराली न जलाने की अपील

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जबलपुर :कृषि विभाग द्वारा किसानों से खेतों में पराली (नरवाई) न जलाने की अपील की गई है। जिले में धान की कटाई अधिकाशत: कटाई कम्बाइंड हार्वेस्टर से होने के कारण खेत में शेष बची पराली किसानों द्वारा जला दी जाती है जबकि प्रदेश के विभिन्न जिलों तथा अन्य प्रदेशों में पराली का प्रयोग पशुओं के वैकल्पिक आहार के रूप में किया जाता है। पशुओं को खेतों में पर्याप्त मात्रा में पराली न मिलने से वह पालीथिन खाते हैं और उनकी मृत्यु हो जाती है। धान की कटाई के दो-तीन माह बाद यही पराली दोगुनी कीमत में विक्रय की जाती है।
उप संचालक किसान कल्याण एवं कृषि विकास एसके निगम के मुताबिक धान की पराली खेतों में जलाने से मिट्टी की उर्वरक क्षमता कम होती है तथा पर्यावरण भी प्रदूषित होता है। साथ ही आग लगाने के कारण कई गंभीर अग्नि दुर्घटनाएं भी घटित हो चुकी हैं जिससे सम्पत्ति का भी बड़े स्तर पर नुकसान हुआ है। ग्रीष्म ऋतु में जल संकट उत्पन्न होने का भी यह एक महत्वपूर्ण कारण है।उप संचालक कृषि ने किसानों से अपील की है कि वे धान की पराली न जलाएं। खेत की आग अनियंत्रित होने से जन, धन, सम्पत्ति, प्राकृतिक वनस्पति एवं जीव जन्तु नष्ट होते हैं जिससे काफी नुकसान होता है। खेत में आग लगाने से मिट्टी में प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले लाभकारी सूक्ष्म जीवाणु नष्ट हो जाते हैं जिससे मिट्टी उर्वरा शक्ति कम होती है और उत्पादन प्रभावित होता है। खेतों में कचरा सड़ने से वह खाद में परिवर्तित होकर मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ाती है। आग जलाने से हानिकारक गैसों का उत्सर्जन होता है और पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। जिला प्रशासन ने कृषकों से जीरो टिलेज सीड ड्रिल से बोनी करने एवं कस्टम हायरिंग सेंटर से आवश्यक यंत्रों का उपयोग करने की अपील की है। जीरो टिलेज सीड ड्रिल के उपयोग से जहां एक ओर कृषक की लागत कम होती वहीं खेतों में उपलब्ध नमी का भी उपयोग होता।

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ख़बर चुराते हो अभी पोलखोल दूंगा
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