कलेक्टर ने धान एवं मोटे अनाज की खरीदी के लिए जारी किए दिशा-निर्देश

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जबलपुर :कलेक्टर भरत यादव ने खरीफ विपणन मौसम 2019-20 के लिए औसत अच्छी गुणवत्ता (एफएक्यू) की धान तथा मोटे अनाज के उपार्जन के बारे में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किये हैं तथा संबंधित अधिकारियों को इनका कड़ाई से पालन करने की हिदायत दी है कलेक्टर कार्यालय की खाद्य शाखा के मुताबिक कलेक्टर द्वारा जारी दिशा-निर्देशों में उपार्जन कार्य से जुड़े अधिकारियों से कहा गया है कि कृषकों से धान कामन न्यूनतम समर्थन मूल्य 1815 रूपए एवं ए ग्रेड धान 1835 रूपए प्रति क्विंटल के हिसाब से खरीदी जाए। किसानों को अनाज के लिए एसएमएस किया जाए तथा उन्हें साफ-सुथरा एवं एफएक्यू गुणवत्ता का अनाज ही खरीदी केन्द्र पर लाने प्रेरित किया जाए। उपार्जन केन्द्र पर लाए अनाज की ऑनलाइन प्रविष्टि कर किसानों को टोकन पर्ची दी जाए इसके बाद उसी क्रम में अनाज की खरीदी हो। खरीदी को ऑनलाइन दर्ज कर किसानों को उसकी पावती दी जाए।
कलेक्टर द्वारा जारी दिशा-निर्देशों में कहा गया है कि अनाज उपार्जन के समय कृषक का सही खाता नंबर ही दर्ज किया जाए। समिति द्वारा खरीदी केन्द्र पर कृषकों की सहूलियत के लिए कैंटीन, पीने का पानी, बैठने-रूकने के लिए छाया तथा टायलेट की व्यवस्था की जाए। खरीदी केन्द्र पर कृषकों की जानकारी हेतु बोर्ड, बैनर लगाए जाएं। समिति स्तर पर बोरी भराई, तुलाई, सिलाई, छल्ली लगाना तथा केन्द्र स्तर पर छन्ना, पंखा तिरपाल की व्यवस्था की जाए। समिति द्वारा दिनांकवार एसएमएस भेजने एवं जिस किसान से खरीदी की जानी है उसकी जानकारी केन्द्र के बाहर चस्पा की जाए। परिवहनकर्ता द्वारा समर्थन मूल्य पर खरीदी गई धान का 72 घंटों में परिवहन किया जाए।
दिशा-निर्देशों में कहा गया है कि समिति द्वारा पर्याप्त हम्माल, इलेक्ट्रानिक तौल मशीन, सिलाई मशीन, बारदाना एवं सुतली की व्यवस्था की जाएगी। समिति द्वारा शनिवार एवं रविवार छोड़कर सप्ताह में 5 दिन कृषकों से धान एवं अन्य अनाज की खरीदी की जाएगी। शेष दो दिन प्रबंधक उपार्जित अनाज का परिवहन एवं किसानों के खातों में राशि हस्तांतरण सुनिश्चित कराएगा। किसानों को फसल विक्रय के समय पंजीयन की प्रतिलिपि, बैंक पासबुक की प्रति, वनाधिकार पट्टे की प्रति एवं सिकमीदार किसानों के सिकमी अनुबंध पत्र की प्रति लाना अनिवार्य है। किसी अन्य किसान के नाम पर उपार्जन करने वाले किसानों पर कठोर कार्यवाही की जाएगी इस तरह के उपार्जन न किए जाएं। समिति द्वारा धान क्रय करते समय एफएक्यू स्कंध का ही उपार्जन किया जाए।
कलेक्टर द्वारा जारी निर्देशों में अधिकारियों से कहा गया है कि कृषकों को भुगतान जिला स्तर पर नियमानुसार कार्यवाही एवं समन्वय से किया जाए। उपार्जन केन्द्र द्वारा उपार्जित धान का कृषकों को भुगतान निर्धारित समर्थन मूल्य पर किया जाएगा। कम्प्यूटर में उपार्जन की सही मात्रा की इंद्राज, गुणवत्ता पर नियंत्रण एवं क्रियान्वयन कलेक्टर के मार्गदर्शन में जीएम सीसीबी एवं डीआरसीएस द्वारा किया जाएगा। कृषकों का भुगतान जेआईटी से बैंक खाते में किया जाएगा। भुगतान एफएक्यू स्कंध की स्वीकृति पत्रक में दर्ज मात्रा के आधार पर किया जाएगा। उपार्जन एजेंसी सुनिश्चित करेगी कि निर्धारित समय-सीमा में उपार्जित स्कंध का परिवहन हो जाए। समिति परिवहनकर्ता को अनाज की बोरियां तौलकर एवं विधिवत् हस्ताक्षर कराकर देगी इसके बाद भी अगर अनाज में कमी आती है तो इसके जवाबदार स्वयं परिवहनकर्ता होगा। किसानों के पंजीयन में दर्ज बैंक खातों का सत्यापन एनपीसीआई के माध्यम से साप्ताहिक रूप से कराया जाए। बैंक शाखाओं में पर्याप्त कैश क्रेडिट लिमिट उपलब्ध कराई जाए ताकि कृषक को राशि भुगतान में असुविधा न हो।
समिति प्रबंधक द्वारा भुगतान हेतु डिजिटल हस्ताक्षर करने से पूर्व सुनिश्चित किया जाएगा कि किसान का नाम, बैंक खाता क्रमांक, आईएफएससी कोड का मिलान ई-उपार्जन एवं बैंक पासबुक से कर लिया गया है। किसी प्रकार की त्रुटि पर विलम्ब भुगतान के लिए डाटा एन्ट्री आपरेटर एवं समिति प्रबंधक उत्तरदायी होंगे। तहसील स्तरीय जांच दल सभी उपार्जन केन्द्रों की नियमित जांच करेगा तथा समस्या के निराकरण के लिए तत्पर रहेगा। केन्द्रों पर नियुक्त नोडल अधिकारी उपार्जन के समय उपस्थित रहकर उपज की गुणवत्ता पर ध्यान देंगे। उपार्जन केन्द्र पर अनाज लाने वाले किसानों की अनाज खरीदी उसी दिन सुनिश्चित की जाए जब संसाधन उपलब्ध हों। धान की तौल 40 किलोग्राम प्रति बोरी से अधिक मात्रा में न की जाए।
जारी दिशा-निर्देशों में कहा गया है कि शासन द्वारा दी गई स्याही से ही बोरियों को मार्क किया जाए एवं सिलाई हेतु धागे का उपयोग किया जाए। बोरियों में केन्द्र का टैग लगाया जाए और संबंधित किसान का कोड अनिवार्य रूप से दर्ज किया जाए। बोरी के निचले हिस्से के अनाज की एफएक्यू गुणवत्ता देखकर ही क्रय किया जाए और बोरी से बोरी में अनाज न पलटाया जाए। समिति फड़ से ही अनाज का क्रय करे तथा बोरियों में भी स्वयं से अनाज भराएं। किसी भी स्थिति में किसानों को खाली बोरी न दी जाएं। बोरियों की सही स्थिति के प्रदर्शन के लिए जिस दिन खरीद की जाए उसी दिन उसकी कम्प्यूटर में ऑनलाइन प्रविष्टि की जाए। ऑनलाइन प्रविष्टि में बोरियों की पर्याप्त संख्या दिखने पर अलग से बोरियां नहीं दी जाएंगी।
कलेक्टर द्वारा दिए गए दिशा-निर्देशों के मुताबिक परिवहनकर्ता ट्रक लोडिंग चार्ज का भुगतान स्वयं करेगा। भुगतान न करने पर उपार्जन एजेंसी (मार्कफेड) लोडिंग चार्ज की राशि काटकर शेष भुगतान सोसायटी के खाते में करेगी। संग्रहण केन्द्रों के प्रभारी को अमानक स्तर का अनाज पाए जाने की सूचना उसी दिन देनी होगी जिस दिन अनाज का भण्डारण हुआ है। प्रतिदिन गोदाम में जमा अनाज का स्वीकृति पत्रक/डब्ल्यूएचआर की कम्प्यूटरीकृत पावती उसी दिन जारी की जाए जिस दिन अनाज का भण्डारण हुआ है। उपार्जन से संबंधित जिला स्तरीय समिति की प्रति दिन सुबह 10.30 बजे बैठक होगी जिसमें उपार्जन केन्द्र से उपार्जित अनाज परिवहन, केन्द्र पर बोरियों की आवश्यकता एवं अन्य विषयों पर चर्चा कर उसका पालन सुनिश्चित किया जाएगा। जिला स्तर पर उपार्जन संबंधी विवाद की स्थिति में जिला स्तरीय कमेटी द्वारा उसका निराकरण किया जाएगा।
क्रमांक/2280/नवम्बर-273/जैन॥

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ख़बर चुराते हो अभी पोलखोल दूंगा
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