इस वीर सपूत ने दुश्मनों के छुड़ा दिए छक्के गोली लगने के बाद भी नहीँ हारी हिम्मत

गोली लगने के बाद भी पत्नी से फोन लगाकर बोले जल्दी ही ठीक होकर बात करूंगा

भोपाल (देवास). राष्ट्रीय कवि माखनलाल चुतर्वेदी की लिखी कविता ऐसे वीर सपूतों के लिए समर्पित है जिसमें एक पुष्प की अभिलाषा है की चाह नहीं, मैं सुरबाला के
गहनों में गूँथा जाऊँ,
चाह नहीं प्रेमी-माला में बिंध
प्यारी को ललचाऊँ,
चाह नहीं सम्राटों के शव पर
हे हरि डाला जाऊँ,
चाह नहीं देवों के सिर पर
चढूँ भाग्य पर इठलाऊँ,
मुझे तोड़ लेना बनमाली,
उस पथ पर देना तुम फेंक!
मातृ-भूमि पर शीश- चढ़ाने,
जिस पथ पर जावें वीर अनेक

ऐसे वीर बहादुरों का तो मानव ही नहीँ देव भी सम्मान करते है जो अपनी मातृभूमि की रक्षा करते -करते वीर गति को प्राप्त हो जाते है ऐसे ही एक वीर सपूत जिनका जन्म मध्यप्रदेश के देवास में हुआ था वो बुधवार के दिन वीर गति को प्राप्त कर चुके है वहीं मीडिया रिपोर्ट की मानें तो देवास जिले के सीआरपीएफ जवान संदीप यादव की पत्नी ज्योति को गुरुवार रात तक तो यही मालूम था कि उनके पति का गोली लगने के बाद श्रीनगर के अस्पताल में इलाज चल रहा है। गोलीबारी में घायल हुए संदीप ने पत्नी ज्योति को मोबाइल लगाकर कहा कि गोली लगी है, चिंता मत करना, जल्दी बात करूंगा।बाद में जब भी पत्नी ने बात की तो उन्हें श्रीनगर के अस्पताल में भर्ती बताया। ज्योति अपने मायके सामगी गांव में हैं, जिन्हें गुरुवार को दिनभर कुलाला गांव में शहीद की अंत्येष्टि के लिए चली तैयारियों की जानकारी नहीं थी, उसे तो रात तक यही मालूम था कि संदीप श्रीनगर के अस्पताल में भर्ती हैं।यह जानकारी भास्कर को गांव के ही सेना से रिटायर्ड मनोहरलाल चौधरी ने बताई है।बुधवार रात तक संदीप के पिता कांतिलाल यादव अपने रोजमर्रा की तरह कार्य कर रहे थे। रात में ग्रामीणों को सूचना मिल गई थी, लेकिन उन्होंने पिता को पता नहीं चलने दिया कि उनका लाल वीरगति को प्राप्त हो गया। कांतिलाल दो सालों से अखबार ज्यादा पढ़ने लगे थे। क्योंकि उनके बेटे की पदस्थापना कश्मीर हो गई थी।सुबह रोज अखबार पढ़ने की आदत थी, लेकिन गुरुवार को गांव के लोगों ने उनके घर अखबार नहीं पहुंचने दिया। गांव के चौराहे पर लोग बैठे हुए थे। इस बात को वे भांप गए व उन्होंने पेपर की मांग कर ली। तब उन्हें घटना के बारे में पता चला। मायके में शहीद की पत्नी को गुरुवार रात तक भी सूचना नहीं भेजी गई।

घंटेभर पहले दोस्त से की थी बात, हालचाल जाने
संदीप अपने मित्र जितेंद्र यादव से अक्सर बात करते थे। जितेंद्र ने काफी दिनों से संदीप से बात नहीं की थी। जितेंद्र ने संदीप को दोपहर 3 बजे फोन किया। संदीप ने फोन उठाया व उससे बात की। संदीप ने उसके हालचाल जाने व पूछा गांव में सब ठीकठाक है। बस इसके बाद रात 10 बजे जितेंद्र के पास खबर आई कि वह शहीद हो गया।

गुरुवार को भरने वाली थी नए मकान की छत
संदीप का गांव में एक नया मकान भी बन रहा था। उसकी छत गुरुवार को भरने वाली थी, लेकिन इस घटना के चलते उसे नहीं भर पाए। संदीप का एक दस साल का बेटा रोहित है। वह देवास के एक निजी स्कूल में पढ़ता है व इस साल कक्षा 5वीं पास कर छठीं कक्षा में आया है।

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